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विजयदशमी पर संघ ने स्थापना दिवस पर किया पथ संचलन

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                 ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।। मंडी जिले के गाड़ागुशैणी, सरकाघाट व लडभड़ोल में रविवार को विजयदशमी और शस्त्र पूजन के कार्यक्रम पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 95 वां स्थापना दिवस मनाया। इस दौरान स्वयंसेवकों ने पथ संचलन किया है। सरकाघाट में कार्यक्रम की अध्यक्षता हिदी साहित्य के लेखक एवं शिक्षाविद श्री हंसराज भारती ने की। पथ संचालन के दौरान लोगों ले स्वयंसेवकों पर फूलों की बारिश की। लडभड़ोल में आयोजित कार्यक्रम में संघ के खंड कार्यवाहक श्री करतार सिंह ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण इस बार खंडस्तर पर आरएसएस ने स्थापना दिवस मनाया और शस्त्र पूजन किया है। इस अवसर पर जिला कार्यवाह श्री जय प्रकाश, जिला बाल प्रमुख सत्य प्रकाश, खंड शारीरिक प्रमुख सुनील अत्री, खंड बौद्धिक प्रमुख प्रवीण वर्मा, खंड संपर्क प्रमुख रणजीत वर्मा, खंड प्रचार प्रमुख नीति राज, चोलथरा मंडल कार्यवाह विजय, राष्ट्रीय सेविका समिति रीजा ठाकुर, रखोह मंडल कार्यवाह सुनील, चोलथरा शाखा मुख्य शिक्षक उत्कर्ष वर्मा, विविध क्षेत्र से धर्मपुर पंचायत समिति के अध्यक्ष विनोद ठाकुर सहित ...

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक प.पू.डॉ.मोहन भागवत जी का विजयादशमी उत्सव (रविवार दि. 25 अक्तूबर 2020) के अवसर पर दिया गया उद्बोधन

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                 ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।  आज के इस विजयादशमी उत्सव के प्रसंग पर हम सब देख रहे हैं कि उत्सव संख्या की दृष्टि से कम मात्रा में मनाया जा रहा है। कारण भी हम सबको पता है। कोरोना वायरस के चलते सभी सार्वजनिक क्रियाकलापों पर बंधन है।   गत मार्च महीने से देश दुनिया में घटने वाली सभी घटनाओं को कोरोना महामारी के प्रभाव की चर्चा ने मानो ढक दिया है। पिछले विजयादशमी से अब तक बीते समय में चर्चा योग्य घटनाएं कम नहीं हुईं। संसदीय प्रक्रिया का अवलंबन करते हुए अनुच्छेद 370 को अप्रभावी करने का निर्णय तो विजयादशमी के पहले ही हो गया था। दीपावली के पश्चात् 9 नवंबर को श्रीरामजन्मभूमि के मामले में अपना असंदिग्ध निर्णय देकर सर्वोच्च न्यायालय ने इतिहास बनाया। भारतीय जनता ने इस निर्णय को संयम और समझदारी का परिचय देते हुए स्वीकार किया। यह मंदिर निर्माण के आरंभ का भूमिपूजन दिनांक 5 अगस्त को संपन्न हुआ, तब अयोध्या में समारोह स्थल पर हुए कार्यक्रम के तथा देशभर में उस दिन के वातावरण के सात्विक, हर्षोल्लासित परंतु संयमित, पवित्र व स्नेहपूर्ण वाताव...