चालाक बूढ़े बैल और सियार ने मिलकर शेर को बनाया मुर्ख
।।🇮🇳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः🇮🇳।।
एक बैल था। जब वह बूढ़ा हो गया तो उसका मालिक उसे जंगल में छोड़ आया। बैल बूढ़ा ज़रूर था लेकिन था बहुत समझदार। वह अपने गुणों, कमजोरियों और पसंद- नापसंद को अच्छी तरह जानता और समझता था।
अपने मालिक के जाने के बाद जंगल में उसके सामने चुनौती भरी परिस्थितियों उत्पन्न हो गई । वह अपने रहने खाने और सुरक्षा का बंदोबस्त देखने लगा । जल्दी ही उसे एक खाली गुफ़ा मिल गई। गुफ़ा के पास ही एक तालाब था । वहाँ ढे़र सारी घास तथा जंगली पौधे भी थे। बैल को वह स्थान अपने लिए उपयुक्त लगा क्योंकि वहां रहने के साथ-साथ भोजन पानी एवं सुरक्षा की भी पूरी व्यवस्था थी। बैल ने सभी परिस्थितियों का आकलन किया और सुख शांति के साथ आराम से वहां अपनी जिंदगी बिताने का निश्चय किया ।
जंगल में रहते रहते बैल की दोस्ती अन्य जानवरों से भी हो गई । सियार से उसकी घनिष्ठता ज्यादा थी। बैल शान से अकेले रहता था । उसका साहस देख सियार उसे समय-समय पर खतरों से सचेत करता रहता था। दोनों को एक दूसरे पर भरोसा हो गया।
सारा दिन खाते-पीते और सुस्ताते रहने के कारण बैल अच्छा-खासा तंदुरुस्त हो गया था । एक दिन वह गुफ़ा के बाहर बैठा था कि उसे एक शेर अपनी तरफ़ आता दिखाई दिया। बैल घबराया नही, वह शांति और धैर्य पूर्वक बैठा रहा । अपनी ओर आते खतरे को देख वह बचने के उपाय तेजी से सोचने लगा । जब तक शेर नजदीक पहुंचता उसके मन में एक उपाय सूझा ।
जैसे ही शेर उसके नजदीक आया,वह बिना घबराए आत्मविश्वास के साथ गुफा की ओर मुंह करके जोर से बोला, "अरी भाग्यवान! तैयार रहो,आज हमारे बच्चों के लिए बहुत ही अच्छा भोजन मिला है। एक शेर इसी तरफ आ रहा है। शोर मत मचाना । चुप रहना, नहीं तो वह भाग जाएगा । जैसे ही वह मेरे पास आएगा,मैं उसे अपने सिंगों से मार डालूंगा।" बैल की बात सुनकर शेर डर गया और वहां से भाग खड़ा हुआ। शेर ने समझा कि वह उससे भी ज्यादा खतरनाक जानवर है।
पूरी घटना को सियार दूर से देख रहा था । सियार को इस बात का अंदाजा था कि बैल के बाद उसकी बारी आ सकती है। इसलिए सियार ने इस खतरे से निपटने के लिए एक स्थायी उपाय की योजना बनाई। उसने अपनी योजना अनुसार बदहवास भागते शेर को रोककर इस तरह भागने का कारण पूछा। शेर ने सियार को आपबीती सुना दी। सुनकर सियार हंँस पड़ा । शेर से आश्चर्य से पूछा - क्या बात है, हंँस क्यों रहे हो?
"महाराज! आपकी मूर्खता पर हँस रहा हूँ। "
"क्या मतलब!" शेर गुर्राया।
"महाराज! जिससे आप डर रहे है, वह कोई खतरनाक जानवर नही बल्कि एक बैल है...आपका शिकार। आप चलिए मेरे साथ, मैं बताता हूँ वह कौन है।" सियार ने कहा। किन्तु शेर के दिल में तो डर बैठ गया था। वह सियार की बात मानने को तैयार ही नही हुआ।
तब अपनी योजना के अनुसार सियार ने शेर को समझाते हुए कहा- ‘'महाराज आप डरे नही। आप अपनी पूँछ मेरी पूँछ में बाँध ले । मैं आगे रहूँगा। यदि वह जानवर कोई नुकसान पहुँचाएगा तो पहले मैं सामना करूंगा ।" शेर अपने बचाव की शर्त पर सियार के साथ चलने को तैयार हो गया । शेर ने अपनी पूँछ सियार की पूँछ में बाँध ली और सियार के पीछे-पीछे चलने लगा।
जब बैल ने सियार और शेर को एकसाथ आते देखा तो थोड़ा चिंतित हुआ । लेकिन उसे अपने मित्र पर पूरा भरोसा था कि वह उसे नुकसान नहीं पहुंचाएगा और सियार को भी बैल की बुद्धिमानी पर भरोसा था।
शेर के थोड़ा समीप आते हीं बैल जोर से बोला- "ओ सियार! मैंने तो तुझे दो शेर लाने को कहा था और तू एक ही लेकर आ रहा है । इससे तो मेरे बच्चों का पेट भी नही भरेगा। "
बैल की यह बात सुनते ही शेर तेजी से उल्टे पाँव दौड़ पड़ा। सियार की पूँछ शेर की पूँछ के साथ बँधी होने के कारण वह भी शेर के पीछे-पीछे घिसटने लगा । सियार ने शेर से अपनी पूँछ किसी तरह छुड़ाई और शेर भी अपनी जान बचाकर सरपट भागा। सियार को ज्यादा चोट नहीं लगी थी। वह लौटकर बैल के पास आया। दोनों मित्र मिलकर शेर की मूर्खता पर खूब हँसे। सियार ने हँसते हुए कहा- अब यह शेर इधर लौटकर कभी नहीं आएगा।
इस तरह बैल ने समझदारी और हिम्मत से अपनी जान बचा ली। अब दोनों मित्र निर्भय होकर मजे से रहने लगे।
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कथा-सार
जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों एवं चुनौतियों से प्रभावी तथा सकारात्मक तरीके से निपटने में समर्थ बनने के लिए मनुष्य के भीतर कुछ क्षमताएं होती हैं। जिन्हें जीवन कौशल के नाम से जाना जाता है। यह कहानी अपने भीतर की उन क्षमताओं को पहचानने एवं स्वयं में उन्हें विकसित करने के लिए प्रेरित करती है ।
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