सारस पक्षी की शिक्षा – A Moral Story In hindi
।।🚩ॐ श्री गुरुदेवाय नमः🚩।।
प्राचीन समय की बात है एक गाँव में भोलु नाम का एक आलसी किसान रहता था | भोलु ने अपने खेतों में गेहूँ की फसल बो रखी थी|उन्ही में से किसी एक खेत में सारस पक्षी का एक जोड़ा भी रहता था। वहीं उनके अंडे थे। अंडे बढे़ और समय पर उनसे बच्चे निकले। लेकिन बच्चों के बड़े होकर उड़ने योग्य होने से पहले ही खेत की फसल पक गई। सारस बड़ी चिंता में पड़े। किसान खेत काटने आए, इससे पहले ही बच्चों के साथ उसे वहाँ से चले जाना चाहिए पर बच्चे उड़ सकते नहीं थे। सारस ने बच्चों से कहा- “हमारे न रहने पर यदि कोई खेत के पास आए तो उसकी बात सुनकर याद रखना।
एक दिन जब सारस चारा लेकर शाम को बच्चों के पास लौटा तो बच्चों ने कहा- “आज किसान आया था। वह खेत के चारों ओर घूमता रहा। एक-दो स्थानों पर खड़े होकर देर तक खेत को घूरता था। वह कह रहा था कि खेत अब काटने योग्य हो गया। आज चलकर गाँव के लोगों से कहूँगा कि वे मेरा खेत कटवा दें।”
सारस ने कहा- “तुम लोग डरो मत। खेत अभी नहीं कटेगा। अभी खेत कटने में देर है।” ।
कई दिन बाद जब एक दिन सारस शाम को बच्चों के पास आया तो बच्चे बहुत घबराए हुए थे। वे कहने लगे- “अब हम लोगों को यह खेत झटपट छोड़ देना चाहिए। आज किसान फिर आया था। वह कहता था कि गाँव के लोग बडे स्वार्थी हैं। वे मेरा खेत कटवाने का कोई प्रबंध नहीं करते। कल मैं अपने भाइयों को भेजकर खेत कटवा लूंगा।”
सारस बच्चों के पास निश्चित होकर बैठा और बोला- “अभी तो खेत कटता नहीं। दो-चार दिन में तुम लोग ठीक-ठीक उड़ने लगोगे। अभी डरने की आवश्यकता नहीं है।”
कई दिन और बीत गए । सारस के बच्चे उड़ने लगे थे और निर्भय हो गए थे। एक दिन शाम को वे सारस से कहने लगे- “यह किसान हम लोगों को झूठ-मूठ डराता है। इसका खेत तो कटेगा नहीं। वह आज भी आया था और कहता था कि मेरे भाई मेरी बात नहीं सुनते। सब बहाना बनाते हैं। मेरी फसल का अन्न सूखकर झर रहा है। कल बड़े सबेरे मैं आऊँगा और खेत काटूँगा।”
सारस घबरा कर बोला- “चलो ! जल्दी करो ! अभी अँधेरा नहीं हुआ है। दूसरे स्थान पर उड़ चलो। कल खेत अवश्य कट जाएगा।”
बच्चे बोले- “क्यों? इस बार खेत कट जाएगा, यह कैसे?”
सारस ने कहा- ” किसान जब तक गाँववालों और भाइयों के भरोसे था । खेत के कटने की आशा नहीं थी। जो दूसरों के भरोसे कोई काम छोड़ता है, उसका काम नहीं होता। लेकिन जो स्वयं काम करने को तैयार होता है, उसका काम रुका नहीं रहता। किसान जब स्वयं कल खेत काटनेवाला है, तब तो खेत कटेगा ही।”
अपने बच्चों के साथ सारस उसी समय वहाँ से उड़कर दूसरे स्थान पर चला गया।
इस कहानी से यह प्रेरणा मिलती है कि अपना कार्य स्वयं करना चाहिए। स्वयं कार्य करने वाले व्यक्ति हमेशा सफल होते हैं। दूसरों पर आश्रित रहने वाले व्यक्ति की सफलता में संदेह बना रहता है।
यह भी पढ़ें ...
बाबा भारती और डाकू खड़गसिंह। कहानी- “हार की जीत”
सती अनसूया के सतीत्व बल का चमत्कार ! त्रिदेव बने दूधमुँहे बच्चे.
मूर्ख वृक्ष की मूर्खता पुरे जंगल के सफाए का कारण बना।
आशा है कि आपको ये शिक्षाप्रद कहानी- सारस पक्षी की शिक्षा – A Moral Story In hindi. पसंद आएगा. इस लेख से जुड़े आपके कोई विचार हैं तो उसे आप हमारे साथ जरुर साझा करें. हमारे पोस्ट के प्रति अपनी प्रसन्नता और उत्सुकता को दर्शाने के लिए कृपया इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुचाने के लिए Social Media पर share कीजिये.
आप हमें
Facebook –https://www.facebook.com/prerakkathayen.online
आदि Social Media पर देखें, पढ़े, like करें, Follow करें व Subscribe कर अभी जुड़ सकते है ताकि आपको नयी पोस्ट की जानकारी आसानी से मिल सके.
।।🇮🇳भारत माता की जय🇮🇳।।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें