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जानिये! भोजन करने से पूर्व "भोजन मंत्र" का उच्चारण करने से होनेवाले लाभ के बारे में !

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                  । ।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।  भारतीय संस्कृति में भोजन को भी सम्मान देने की परंपरा है। इसलिए शास्त्रों के अनुसार भोजन ग्रहण करने से पूर्व हमें "भोजन मंत्र" का उच्चारण जरूर करना चाहिए । आध्यात्मिक द्रष्टि से भोजन ग्रहण करने से पूर्व बोले गये मंत्र का बड़ा महत्व है | "भोजन मंत्र" द्वारा हम अन्न देवता का आव्हान करते है व उनके द्वारा हमें दिए गये उस भोजन का धन्यवाद् भी करते है और ऐसी कामना करते है कि इस संसार में कोई भी भूखा न रहे | यदि आप भी चाहते है कि आपके द्वारा ग्रहण किये गये भोजन से आपको सभी रसों की प्राप्ति हो व आपके द्वारा ग्रहण किया गया भोजन आपके शरीर को लगे तो आज से भोजन करने से पूर्व नीचे दिए मंत्र का उच्चारण करना शुरू कर दे | तो आइये जानते है भोजन ग्रहण करने से पूर्व बोले जाने वाले मंत्र को - भोजन पूर्व उच्चारणीय मंत्र "भोजन मंत्र" ॐ ब्रह्मार्पणम् ब्रह्महविर् ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् । ब्राँव तेन गन्तव्यम् ब्रह्मकर्म समाधिना ।।     (गीता)  यज्ञ में आहुति देने का साधन (सुचि, सुवा, हाथ की मृगि, हंस...

"आर्षवाणी" संघ के बैठकों के प्रारम्भ में बोले जाने वाला मंत्र अर्थात् "वैदिक संगठन मंत्र"

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।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।                                          आर्षवाणी संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्। देवा भागं यथा पूर्वे सजानाना उपासते ।। पग से पग (कदम से कदम) मिलाकर चलो, स्वर में स्वर मिलाकर बोलो, तुम्हारे मनों में समान बोध हो। पूर्वकाल में जैसे देवों ने अपना भाग प्राप्त किया, सम्मिलित बुद्धि से कार्य करने वाले उसी प्रकार अपना-अपना अभीष्ट प्राप्त करते हैं। ॐ May we march forward with a common goal. May we be open-minded and work together in harmony.May we share our thoughts for integrated wisdom. May we follow the example of our ancestors who achieved higher goals by virtue of being united. समानो मन्त्रः समितिः समानी समानं मनः सहचित्तमेषाम्। समानं मन्त्रमभिमन्त्रये वः समानेन वो हविषा जुहोमि।। इन (मिलकर कार्य करने वालों) का मन्त्र समान होता है अर्थात् ये परस्पर मन्त्रणा करके एक निर्णय पर पहुंचते हैं, चित्त सहित इनका मन समान होता है। मैं तु...

"ईश्वर एक है" का भाव को व्यक्त करता "एकात्मता मंत्र" (एकता मंत्र)

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                   ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।  यं वैदिका मन्त्रदृशः पुराणा इन्द्रं यमं मातरिश्वानमाहुः। वेदन्तिनोऽनिर्वचनियमेकं यं ब्रह्मशब्देन विनिर्दिशन्ति ॥ १ ॥ प्राचीन काल के मन्त्रद्रष्टा ऋषियों ने जिसे इंद्र , यम , मातरिश्वान (वैदिका देवता) कहकर पुकारा और जिस एक अनिर्वचनीय को वेदान्ती ब्रह्म शब्द से निर्देश करते हैं ॥१॥ Mantradrishta sages of ancient times called Indra, Yama, Matrishvana (Goddess Vaidika) and the one who instructed the non-Vedanti with the word Vedanti Brahma।।1।। शैवा यमीशं शिव इत्यवोचन् यं वैष्णवा विष्णुरितिस्तुवन्ति। बुद्धस्तथाऽर्हन्निति बौद्धजैनाः स त् श्री अकालेति च सिक्ख संतः ॥२॥ शैव जिसकी शिव और वैष्णव जिसकी विष्णु कहकर स्तुति करते हैं। बौद्ध और जैन जिसे बुद्ध और अर्हन्त कहते हैं तथा सिक्ख सन्त जिसे सत् श्री अकाल कहकर पुकारते हैं ॥२॥ Shaivite, whom Shiva and Vaishnavas praise as Vishnu.  Buddhists and Jains called Buddha and Arhant and Sikh saints called Satta Akal ।। 2।।  शास्तेति केचित् प्...

प्रातः स्मरणीय "भारत एकात्मता स्तोत्र"। मूल संस्कृत रूप और उसके हिंदी व अंग्रेजी भावार्थ सहित।

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                    ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।। देश के प्रति अनन्य भक्ति, पूर्वजो के प्रति अगाध श्रद्धा तथा सम्पूर्ण देश में निवास करने वाले बन्धु-बान्धवों के प्रति एकात्मता का  बोध कराने वाले इन मंत्रों का नित्य प्रति पाठ करना चाहिए। ॐ सच्चिदानंदरूपाय नमोस्तु परमात्मने ।  ज्योतिर्मयस्वरूपाय विश्वमांगल्यमूर्तये॥१॥ ॐ, सत्य, चित और आनंद रुप, प्रकाश स्वरुप, विश्व कल्याण के धाम परमात्मा को नमन ||१|| Om. I bow to the supreme Lord who is the very embodiment of Truth, Knowledge and Happiness, the one who is enlightened, and who is the very incarnate of universal good. ॥१॥   प्रकृतिः पंचभूतानि ग्रहलोकस्वरास्तथा ।  दिशः कालश्च सर्वेषां सदा कुर्वंतु मंगलम्‌॥२॥  प्रकृति, पञ्च भूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश), ग्रह (मंगल, बुध, शुक्र आदि), संगीत के सातों सुर, दसों दिशाएं और भूत, वर्तमान और भविष्य समस्त कालों में सदैव कल्याणकारी हों ||२||  May all these cause perpetual good to us: Nature composed of three qualities i....

विजयदशमी पर संघ ने स्थापना दिवस पर किया पथ संचलन

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                 ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।। मंडी जिले के गाड़ागुशैणी, सरकाघाट व लडभड़ोल में रविवार को विजयदशमी और शस्त्र पूजन के कार्यक्रम पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 95 वां स्थापना दिवस मनाया। इस दौरान स्वयंसेवकों ने पथ संचलन किया है। सरकाघाट में कार्यक्रम की अध्यक्षता हिदी साहित्य के लेखक एवं शिक्षाविद श्री हंसराज भारती ने की। पथ संचालन के दौरान लोगों ले स्वयंसेवकों पर फूलों की बारिश की। लडभड़ोल में आयोजित कार्यक्रम में संघ के खंड कार्यवाहक श्री करतार सिंह ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण इस बार खंडस्तर पर आरएसएस ने स्थापना दिवस मनाया और शस्त्र पूजन किया है। इस अवसर पर जिला कार्यवाह श्री जय प्रकाश, जिला बाल प्रमुख सत्य प्रकाश, खंड शारीरिक प्रमुख सुनील अत्री, खंड बौद्धिक प्रमुख प्रवीण वर्मा, खंड संपर्क प्रमुख रणजीत वर्मा, खंड प्रचार प्रमुख नीति राज, चोलथरा मंडल कार्यवाह विजय, राष्ट्रीय सेविका समिति रीजा ठाकुर, रखोह मंडल कार्यवाह सुनील, चोलथरा शाखा मुख्य शिक्षक उत्कर्ष वर्मा, विविध क्षेत्र से धर्मपुर पंचायत समिति के अध्यक्ष विनोद ठाकुर सहित ...

नागपुर में विजयदशमी पर सरसंघचालक प.पू.डाॅ मोहन भागवत के संबोधन की जानिए 10 बड़ी बातें

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                     ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।। महाराष्ट्र के नागपुर में बने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय में विजयदशमी पर्व जोरशोर से मनाया गया. कोरोना की वजह से इस बार समारोह में खास सतर्कता बरती गई.  विजयदशमी पर्व में प.पू.डाॅ मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कोरोना, चीन, हिंदुत्व और राम मंदिर से लेकर तमाम बड़े मुद्दों पर बात कर संघ का नजरिया स्पष्ट करने की कोशिश की. आइए जानते हैं, उनके संबोधन की 10 बड़ी बातें - 1. चीन के विरुद्ध भारत तनकर खड़ा हो गया है  भागवत जी ने कहा कि चीन की आदत विस्तारवादी है. उसने भारत के साथ ही एक साथ ही अमेरिका और कई अन्य देशों के साथ विवाद किया है. लेकिन भारत उसके खिलाफ तनकर खड़ा हो गया है. भारत के नागरिको ने उसको धक्का दिया और इतना दिया कि वो पीछे हट जाए. अब हमें उसे मात देने के लिए अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उससे आगे निकलना होगा. 2. चीन की गलतफहमी दूर हो गई होगी उन्होंने कहा कि हम सबसे मित्रतता करने वाले देश हैं लेकिन हम दुर्बल नहीं है. जो ऐसा समझते हैं कि वे हमे...

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक प.पू.डॉ.मोहन भागवत जी का विजयादशमी उत्सव (रविवार दि. 25 अक्तूबर 2020) के अवसर पर दिया गया उद्बोधन

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                 ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।  आज के इस विजयादशमी उत्सव के प्रसंग पर हम सब देख रहे हैं कि उत्सव संख्या की दृष्टि से कम मात्रा में मनाया जा रहा है। कारण भी हम सबको पता है। कोरोना वायरस के चलते सभी सार्वजनिक क्रियाकलापों पर बंधन है।   गत मार्च महीने से देश दुनिया में घटने वाली सभी घटनाओं को कोरोना महामारी के प्रभाव की चर्चा ने मानो ढक दिया है। पिछले विजयादशमी से अब तक बीते समय में चर्चा योग्य घटनाएं कम नहीं हुईं। संसदीय प्रक्रिया का अवलंबन करते हुए अनुच्छेद 370 को अप्रभावी करने का निर्णय तो विजयादशमी के पहले ही हो गया था। दीपावली के पश्चात् 9 नवंबर को श्रीरामजन्मभूमि के मामले में अपना असंदिग्ध निर्णय देकर सर्वोच्च न्यायालय ने इतिहास बनाया। भारतीय जनता ने इस निर्णय को संयम और समझदारी का परिचय देते हुए स्वीकार किया। यह मंदिर निर्माण के आरंभ का भूमिपूजन दिनांक 5 अगस्त को संपन्न हुआ, तब अयोध्या में समारोह स्थल पर हुए कार्यक्रम के तथा देशभर में उस दिन के वातावरण के सात्विक, हर्षोल्लासित परंतु संयमित, पवित्र व स्नेहपूर्ण वाताव...