"आर्षवाणी" संघ के बैठकों के प्रारम्भ में बोले जाने वाला मंत्र अर्थात् "वैदिक संगठन मंत्र"

।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।


    

                                   आर्षवाणी


संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।

देवा भागं यथा पूर्वे सजानाना उपासते ।।

पग से पग (कदम से कदम) मिलाकर चलो, स्वर में स्वर

मिलाकर बोलो, तुम्हारे मनों में समान बोध हो। पूर्वकाल में जैसे देवों ने अपना भाग प्राप्त किया, सम्मिलित बुद्धि से कार्य करने वाले उसी प्रकार अपना-अपना अभीष्ट प्राप्त करते हैं।


ॐ May we march forward with a common goal. May we be open-minded and work together in harmony.May we share our thoughts for integrated wisdom. May we follow the example of our ancestors who achieved higher goals by virtue of being united.


समानो मन्त्रः समितिः समानी समानं मनः सहचित्तमेषाम्।

समानं मन्त्रमभिमन्त्रये वः समानेन वो हविषा जुहोमि।।

इन (मिलकर कार्य करने वालों) का मन्त्र समान होता है

अर्थात् ये परस्पर मन्त्रणा करके एक निर्णय पर पहुंचते हैं, चित्त सहित इनका मन समान होता है। मैं तुम्हें मिलकर समान

निष्कर्ष पर पहुँचने की प्रेरणा (या परामश) देता हूँ, तुम्हें समान भोज्य प्रदान करता हूँ।


May our prayers be one. May we belong to one brotherhood.May our hearts and minds move toward one supreme goal. May we be inspired by common ideals


समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः।

समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति।।

तुम्हारी भावना या संकल्प समान हो, तुम्हारे हृदय समान

हो। तुम्हारा मन समान हो, जिससे तुम लोग परस्पर सहकार

कर सको।


May our aspirations be harmonious. May our minds be in unison.May we strive to reduce disparity. May we be bound in strong fellowship and unity.


                ।।⛳ॐ शांति: शांति: शांति:⛳।।

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